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बुधवार, 24 जुलाई 2013

वोटबैंक के लिए ओबामा को खत !

उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र की जनता की फिक्र नहीं है...उनके पास अपने संसदीय क्षेत्र में जाने का वक्त नहीं है..! ये छोड़िए कई माननीयों के पास संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेना तक का वक्त नहीं है लेकिन किसी खास वर्ग के मतदाताओं को साधने की कला इन्हें बखूबी आती है..! कैसे अपने बयानों के जरिए, अपने अजीबो गरीब कारनामों के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में किया जाए इस कला में इन्हें महारथ हासिल है लेकिन जनता की समस्याओं को संसद में उठाना या फिर अपने स्तर पर सक्षम होते हुए भी उनका निराकरण करना इन्हें फिजूल लगता है..!
जनता से जुड़े मसले, देशहित के मसलों पर न तो इनकी जुबान खुलती है और न ही इनकी कलम चलती है लेकिन कुर्सी पाने के लिए जुबान भी कैंची की तरह चलती है और चिट्ठी भी ये खूब लिखते हैं..!
बात हो रही है लोकसभा के उन 40 और राज्यसभा के 25 सांसदों की जिन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को खत लिखकर नरेन्द्र मोदी को वीजा नहीं देने की अपनी मौजूदा नीति को बनाए रखने की अपील की है।
इन माननीयों के पास इस चिट्ठी को लिखने के लिए खूब वक्त है, हो भी क्यों न आखिर मसला वोटबैंक से जो जुड़ा हुआ है...! इन्हें ये साबित भी तो करना है कि वे एक खास वर्ग के लोगों के शुभचिंतक हैं, उऩके लिए अमेरिका के राष्ट्रपति को तक चिट्ठी लिख सकते हैं..!
चिट्ठी लिखकर ये सांसद इतना इतरा रहे हैं मानो इन्होंने कोई जंग जीत ली हो लेकिन ये लोग शायद इतना नहीं समझते कि उनकी इस हरकत से वे खुद उपहास का पात्र बन रहे हैं..! अपने राजनीतिक ओछेपन को दूसरे देश के सामने उजागर कर रहे हैं कि वे लोग वोटबैंक के लिए किस हद तक जा सकते हैं..!
चीन आए दिन भारतीय सीमा में घुसपैठ कर भारत को चुनौती दे रहा है, पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से भारत जूझ रहा है, भूख और कुपोषण से भारत में हजारों मौत हो रही हैं, महंगाई अपने चरम पर है, भ्रष्टाचारी और घोटालेबाज जनता की गाढ़ी कमाई को उड़ा रहे हैं लेकिन इन माननीयों ने कभी जनता से जुड़े मुद्दों पर, देशहित से जुड़े मुद्दों पर इतनी गंभीरता नहीं दिखाई, संसद में आवाज नहीं उठाई लेकिन वोटों के लिए ये कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं..!
मैं नरेन्द्र मोदी को वीजा न देना के अमेरिका के फैसले को सही या गलत नहीं ठहरा रहा हूं..! ये अमेरिकी की अपनी नीति है और मोदी को वीजा देना न देना उसका विशेषाधिकार है लेकिन इसको लेकर भारतीय सांसदों का विशेष वर्ग के वोटबैंक को साधने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखना  गले नहीं उतरता..!
इन सांसदों की चिट्ठी पर अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा क्या सोच रहे होंगे ये इस पोस्ट के साथ साझा किए गए कार्टूनिस्ट नवल के कार्टून में बेहतर ढंग से दर्शाया गया है..!

deepaktiwari555@gmail.com