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रविवार, 9 जून 2013

शराब चीज ही ऐसी है न छोड़ी जाए

शराब चीज ही ऐसी है न छोड़ी जाए...पंकज उधास की गज़ल के ये बोल तो आपने सुने ही होंगे। मैंने भी आज से पहले इन बोलों को सिर्फ सुना ही था इसे साक्षात रुप में देखा नहीं था लेकिन रविवार को ये बोल मुझे बकायदा दौड़ते हुए दिखाई दिए। दरअसल मैं अपने एक मित्र के साथ दिल्ली के मयूर विहार फेज थ्री की मार्केट से गुजर रहा था। हमने देखा कि मार्केट के साथ ही लगे पार्क के सामने मदिरा की दुकान पर खूब रौनक थी।
मदिरा की दुकान के सामने पार्क में भी शराबियों की महफिल सजी हुई थी। इसी बीच दिल्ली पुलिस के दो जवान डंडा फटकारते हुए पार्क में दाखिल हुए तो पार्क में भगदड़ मच गयी। पुलिस कर्मियों के तेवर देखकर समझ में आ गया था कि उनका इरादा किसी को पकड़ने का नहीं था बस पार्क में मदिरा का सेवन कर रहे लोगों को खदेड़ना था। शायद ये पुलिसकर्मियों की रोज की एक्सरसाईज थी खैर जो भी हो लेकिन पार्क का नजारा बड़ा ही जबरदस्त था...शायद में इसे उस अंदाज में शब्दों में न बयां कर पाऊं...फिर भी कोशिश करता हूं।
दोनों पुलिस जवान अलग-अलग दिशा में शराबियों को डंडा फटकारते हुए खदेड़ने लगे। इसी बीच मेरी नजर एक युवक पर पड़ी जिसकी उम्र करीब 35 से 40 वर्ष रही होगी। जिस दिशा में हम आगे बढ़ रहे थे उसी दिशा में यह युवक पार्क के अंदर दौड़ रहा था और बार – बार पीछे मुड़ - मुड़ कर पुलिसवालों को देख रहा था। युवक के एक हाथ में डिस्पोजल गिलास में शराब थी तो दूसरे हाथ में पानी का पाउच। काफी आगे तक दौड़ने के बाद जब युवक को लगा कि अब पुलिसकर्मी उसके तरफ नहीं आ रहे हैं तो वह एक पल को रुका और फिर उसने चैन की सांस लेते हुए एक ही घूंट में पूरा गिलास खाली कर दिया और फिर शान से आगे बढ़ गया। हमारी केन्द्र में सिर्फ यह युवक था लेकिन पार्क में इधर उधर भाग रहे मदिरा प्रेमियों की हालत एक जैसी ही थी।
फिर से ये पंक्तियां दोहरा रहा हूं- शराब चीज ही ऐसी है न छोड़ी जाए...ये मेरे यार के जैसी है न छोड़ी जाए। वाकई में उस युवक को देखकर लग रहा था कि उसके लिए शराब के क्या मायने हैं..? उसके लिए शराब क्या चीज है..? जिस तरह वह शराब के गिलास को पकड़कर दौड़ रहा था उससे उस युवक का मदिरा प्रेम तो कम से कम जाहिर हो ही रहा था। अब लोग कहते हैं तो कहते रहें कि शराब बुरी चीज है...शराब पीना छोड़ दो। अब शराब की बोतल में लिखा हुआ होता है कि मदिरा सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो लिखा रहे लेकिन शराब पीने का आनंद उस युवक से बेहतर कौन समझा सकता है जो पुलिसकर्मियों से बचकर भाग रहा है लेकिन शराब का गिलास उसने नहीं छोड़ा और जैसे ही उसे मौका मिला एक ही सांस में पूरा गिलास खाली कर दिया और शान से अपने रास्ते चल दिया...जैसे वह कोई बड़ी जंग जीतकर आ रहा हो।

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