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सोमवार, 3 जून 2013

आडवाणी- ढ़लता हुआ सूरज..!

लगता है भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को अभी भी पीएम की कुर्सी मिलने की पूरी आस है..! ये बात अलग है कि उनके नाम की पैरवी करने वाला उनके सिवाय अब भाजपा में कोई नहीं है लेकिन अपने दम पर अपने सियासी बोलों के जरिए आडवाणी किसी भी तरह की गणित भिड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं..! ग्वालियर में आडवाणी का मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी से बेहतर बताना तो कम से कम इसी ओर ईशारा कर रहा है..!
देखा जाए तो आडवाणी ने शिवराज को मोदी से बेहतर सीएम कहकर न सिर्फ पार्टी में नरेन्द्र मोदी का कद छोटा करने की कोशिश की बल्कि मोदी के पीएम पद की उम्मीदवारी की राह में रोड़ा अटकाने की भी पूरी कोशिश की..!
2014 में एनडीए की सरकार बनने की स्थिति में पीएम इन वेटिंग का टिकट कन्फर्म करने के लिए आडवाणी चाहकर भी खुद की दावेदारी तो ठोंक नहीं सकते लिहाजा आडवाणी के पास एक ही रास्ता बचता है कि इस दौड़ में सबसे आगे चल रहे नरेन्द्र मोदी की चाल को धीमा कर दिया जाए और इसके लिए आडवाणी ने सहारा लिया शिवराज सिंह के नाम का..! आडवाणी को शायद ये उम्मीद थी कि मोदी का कद छोटा होने से मोदी अगर पीएम की उम्मीदवारी की दौड़ में पिछड़ते हैं तो ऐसे में क्या पता धोखे से ही सही उनका पीएम इन वेटिंग का टिकट कन्फर्म हो जाए..!
आडवाणी ने अपने इस बयान से न सिर्फ लोगों की नजरों में मोदी का कद घटाने की पूरी कोशिश की बल्कि मोदी को विरासत में विकसित गुजरात प्रदेश मिलने की बात कहकर कांग्रेस को मोदी के खिलाफ बैठे बिठाए एक मुद्दा दे दिया..! ऐसा इसलिए क्योंकि मोदी जगह- जगह अपने भाषणों में गुजरात में कांग्रेस सरकार के गड्ढ़े भरने की बातें बड़े जोश के साथ करते हैं और गुजरात के विकास का श्रेय लेने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ऐसे में लाल कृष्ण आडवाणी अगर ये कहें कि मोदी को विरासत में विकसित राज्य मिला तो मोदी के दावों पर सवाल उठने लाजिमी हैं..!
आडवाणी के मन की ख्वाहिश उनकी इस कोशिश के बहाने जुबां पर आयी तो मोदी के नाम पर 2014 में अपनी नैया पार लगाने को कोशिश में लगी भाजपा में भी भूचाल आना लाजिमी था ऐसे में पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को सफाई देने खुद आगे आना पड़ा और राजनाथ सिंह ने मोदी को सर्वाधिक लोकप्रिय नेता कहकर न सिर्फ एक बार फिर से नमो नमो का जाप किया बल्कि आडवाणी के बयान का गलत मतलब निकालने की बात कहकर भी मामला ठंडा करने की कोशिश की..!
इतना ही नहीं कुछ दिन पहले तक मोदी के साथ बराबर की दौड़ लगा रहे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी खुद की तारीफ में निकले आडवाणी के बोल को मोदी की तरफ उछाल दिया और खुद को मोदी और रमन सिंह के बाद तीसरे नंबर पर रखकर इस विवाद से ही किनारा कर लिया..!
आडवाणी ने शिवराज को आगे कर मोदी को पीछे करने की कोशिश कर अपने लिए आखिरी रास्ता बनाने की कोशिश तो की लेकिन आडवाणी की इस कोशिश पर उनके अपनों ने ही पानी फेर दिया..! इतना सब होने के बाद आडवाणी को अब तो कम से कम ये समझ लेना चाहिए कि वे भाजपा में अब एक ढ़लते हुए सूरज की तरह हैं और ढ़लते हुए सूरज को कई सलाम नहीं करता..!

deepaktiwari555@gmail.com