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बुधवार, 14 सितंबर 2011

हिंदी हैं हम वतन से....

हिंदुस्तान में हिंदी की दुर्दशा देखते हुए 1947 से पहले का अग्रेजों भारत छोडो का नारा याद आता हैकैसे अंग्रेजों को आखिर भारत को छोड कर जाना पडा थालगता है अब फिर से जरूरत है ऐसे ही एक नारे की...अंग्रेजी भारत छोडोलेकिन हिंदुस्तान में ऐसा संभव नहीं दिखता क्योंकि यहां हर सरकारी कार्यालय में हिंदी दिवस तो मनाया जाता है...लेकिन इसके लिए आदेश अंग्रेजी मे जारी किय़े जाते हैं
हमारे देश के प्रधानमंत्री औऱ सर्वोच्च पद पर बैठे लोग हिंदी बोलने में अपनी तौहीन समझते हैं...तो क्या इन्हें हक है हिंदुस्तान में सर्वोच्च पदों पर आसीन होने का...
मेरा कहने का मतलब य़े नहीं कि आप अंग्रेजी को पूर्णत: विसर्जित कर दें...बल्कि अपने अधिक से अधिक काम हिंदी में करने की आदत डालें...शायद हम आम हिंदुस्तानी हिंदी का कुछ मान बचा पाएं...हमारे देश के प्रधानमंत्री को तो शायद शर्म आती है हिंदी बोलने में...आपने सुना है कभी उन्हें हिंदी बोलते हुए...
?
इसी उम्मीद में कि ये पंक्तियां वाकई में सार्थक हों...हिंदी हैं हम...हिंदी हैं हम वतन से हिंदोस्तान हमारा...आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं...जय हिंदुस्तान....जय हिंदी

दीपक तिवारी


गुरुवार, 8 सितंबर 2011

एक औऱ धमाका....



एक के बाद एक धमाके होते हैं...लोग मरते हैं...हर बार हमारे प्रधानमंत्री औऱ गृहमंत्री कहते हैं कि हम इसका मुंहतोड जवाब देंगे...हमारे सब्र की परीक्षा मत लो कहते हैं...लेकिन इस सब में अपनों को खो चुके लोगों का दर्द किसी को दिखायी नहीं देता...किसी ने अपना बेटा खोया...किसी ने पिता...किसी ने भाई तो किसी ने अपनी मां व बहन...समय के साथ घाव भरते हैं...लेकिन फिर एक दिन एक औऱ धमाका होता है...औऱ फिर वही हालात...लेकिन किसे फिक्र है इस सब की...उनमें इनका कोई अपना नहीं है ना....

ऐसे हालातों में तो हर चेहरे को देखने पर उस पर ये पंक्तियां लिखी मिलती हैं.....


कब तक आंख रोएगी...कहां तक किसी का गम होगा...

मेरे जैसा तो कोई न...कोई यहां रोज कम होगा...

बुधवार, 24 अगस्त 2011

लोकपाल औऱ जनलोकपाल


लोकपाल औऱ जनलोकपाल

समाजसेवी अन्ना हजारे औऱ उनकी टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए जनलोकपाल बिल का मसौदा तैयार कर इसे लागू करने को लेकर अपना आंदोलन शुरू किया...इसकी शुरूआत अन्ना एंड टीम ने अप्रेल 2011 में जंतर मंतर से की थी...जिसके बाद सरकार ने स्टैंडिंग कमेटी का गठन किया...जिसमें अन्ना एंड टीम भी शामिल थी...लेकिन यहां पर भी बात नहीं बनी...औऱ सरकार ने अन्ना एंड टीम की सिफारिशों को दरकिनार करते हुए सरकारी लोकपाल बिल ड्राफ्ट किया। जिसके विरोध में 16 अगस्त से शुरू हुआ अन्ना का आंदोलन किस तरह जनांदोलन बन गया...इसे बताने की जरूरत नहीं है। इसी बीच अरूणा रॉय ने भी एक बिल ड्राफ्ट किया।

एक नजर सरकारी लोकपाल, जनलोकपाल औऱ अरूणा रॉय के लोकपाल पर....

सरकारी लोकपाल
जनलोकपाल
अरूणा रॉय लोकपाल
सरकारी लोकपाल के पास भ्रष्टाचार के मामलों पर खुद या आम लोगों की शिकायत पर सीधे कार्रवाई शुरू करने का अधिकार नहीं होगा।
प्रस्तावित जनलोकपाल बिल के तहत लोकपाल खुद किसी भी मामले की जाँच शुरू करने का अधिकार रखता है।
राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निवारण लोकपाल- इसके दायरे में प्रधानमंत्री को कुछ शर्तो के साथ लाया जाए. प्रधानमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला चलाने का फैसला लोकपाल की पूर्ण पीठ करे और सुप्रीम कोर्ट की पूर्ण पीठ अनुमोदन करे. सांसद और वरिष्ठ मंत्री लोकपाल के दायरे में रहें.
सरकारी विधेयक में लोकपाल केवल परामर्शदात्री संस्था बन कर रह जाएगी।
जनलोकपाल सशक्त संस्था होगी।
पृथक न्यायपालिका लोकपाल- न्यायपालिका के लिए अलग से.

सरकारी विधेयक में लोकपाल के पास पुलिस शक्ति नहीं होगी।
जनलोकपाल न केवल प्राथमिकी दर्ज करा पाएगा बल्कि उसके पास पुलिस फोर्स भी होगी।
केंद्रीय सतर्कता लोकपाल- दूसरी व तीसरी श्रेणी के अफसरों के भ्रष्टाचार के लिए सतर्कता आयोग को ही और अधिक ताकतवर बनाया जाए.

सरकारी विधेयक में लोकपाल का अधिकार क्षेत्र सांसद, मंत्री और प्रधानमंत्री तक सीमित रहेगा।
जनलोकपाल के दायरे में प्रधानमत्री समेत नेता, अधिकारी, न्यायाधीश सभी आएँगे।
लोकरक्षक कानून लोकपाल- भ्रष्टाचार की शिकायत करने वाले लोगों की सुरक्षा मुहैया कराने के लिए.
लोकपाल में तीन सदस्य होंगे जो सभी सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे।
जनलोकपाल में 10 सदस्य होंगे और इसका एक अध्यक्ष होगा। चार की कानूनी पृष्टभूमि होगी। बाक़ी का चयन किसी भी क्षेत्र से होगा।
शिकायत निवारण लोकपाल-जन शिकायतों के जल्द निपटारे लिए है.
सरकार द्वारा प्रस्तावित लोकपाल को नियुक्त करने वाली समिति में उपराष्ट्रपति। प्रधानमंत्री, दोनो सदनों के नेता, दोनों सदनों के विपक्ष के नेता, कानून और गृहमंत्री होंगे।
प्रस्तावित जनलोकपाल बिल में न्यायिक क्षेत्र के लोग, मुख्य चुनाव आयुक्त, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, भारतीय मूल के नोबेल और मैगासेसे पुरस्कार के विजेता चयन करेंगे।


सरकारी लोकपाल विधेयक में दोषी को छह से सात महीने की सजा हो सकती है और घोटाले के धन को वापिस लेने का कोई प्रावधान नहीं है।

जनलोकपाल बिल में कम से कम पाँच साल और अधिकतम उम्र कैद की सजा हो सकती है। साथ ही दोषियों से घोटाले के धन की भरपाई का भी प्रावधान है।



राम मनोहर लोहिया ने कहा था कि जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करती...जिस कानून को आजादी के वक्त अस्तित्व में आ जाना चाहिए था...उसका इंतजार 1969 से हो रहा है। अब जाकर इस कानून के लिए गंभीरता दिख रही है...उसमें भी सरकार गेंद अपने पाले में रखना चाहती है। सरकार चाहती है कि प्रधानमंत्री औऱ न्यायपालिका को इसके दायरे से बाहर रखा जाए...लेकिन अन्ना एंड टीम के जनलोकपाल में प्रधानमंत्री औऱ न्यायपालिका दोनों को इसके दायरे में लाने की बात कही गयी है...यही बात अरूणा रॉय ने भी अपने बिल में कही है। मेरा मानना है कि हिंदुस्तान में भ्रष्टाचार सारी सीमाएं पार कर चुका है...औऱ आम जनता इसे बुरी तरह त्रस्त है...इसलिए जब अन्ना हजारे ने जनलोकपाल के लिए लड़ाई का शंखनाद किया तो देशवासियों ने इसे हाथों हाथ लिया...औऱ देशभर में हर वर्ग औऱ आयु के लोग तिरंगा हाथ में लेकर अपने – अपने तरीके से इसका समर्थन कर रहे हैं। लोग भले ही इसे भीड का नाम दे रहे हैं...लेकिन ये भीड नहीं भ्रष्टाचार औऱ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ वो जनाक्रोश है...जो लंबे समय से किसी शांत ज्वालामुखी की तरह फटने का इंतजार कर रहा था...अगर सरकार झुकती है...जिसके आसार भी नजर आ रहे हैं...औऱ जनलोकपाल को पूरी तरह से सरकार स्वीकार कर संसद में पेश भी करती है...औऱ ये पारित होकर कानून बनता है तो भी मुझे नहीं लगता कि भ्रष्टाचार पर पूरी तरह अंकुश लग पाएगा...या भ्रष्टाचारी इससे तौबा कर लेंगे...क्योंकि जब तक आम लोग पूरी तरह इसका विरोध नहीं करेंगे...औऱ ठान लेंगे कि वे अपने किसी काम के लिए रिश्वत नहीं देगे...भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं देंगे...तब तक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकलेगा। इसलिए जरूरत है हर किसी को अपने अंदर वो इच्छाशक्ति पैदा करे कि भ्रष्टाचार अपना सिर ही न उठा सके। जनलोकपाल कानून बन भी जाता है तो ये तभी सार्थक होगा...जब देश के हर एक नागरिक इसकी ताकत को समझे...औऱ जिस दिन वे ये समझ जाएंगे...उस दिन एक हद भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सकेगा।  


दीपक तिवारी
deepaktiwari555@gmail.com



मैं भी अन्ना...तू भी अन्ना...अब तो सारा देश है अन्ना...




मैं भी अन्ना...तू भी अन्ना...अब तो सारा देश है अन्ना...
हाथ में लेकर तिरंगा...हर कोई लगता है अन्ना...
जनलोकपाल से डरने वाले भागो...जहां जाओगे पाओगे अन्ना...
मैं भी अन्ना...तू भी अन्ना...अब तो सारा देश है अन्ना...
निकल पड़े हैं लेकर तिरंगा...अब नहीं है हमें रूकना...
बनकर अन्ना बढ रहे हैं आगे...जनलोकपाल को लागू करवाने...
मैं भी अन्ना...तू भी अन्ना...अब तो सारा देश है अन्ना...
चाहे मारो लाठी-गोली...चाहे भेजो हमको जेल...
आगे बढ़कर अपना हक छीनेंगे...भ्रष्टाचारियों को नहीं छोड़ेंगे...
मैं भी अन्ना...तू भी अन्ना...अब तो सारा देश है अन्ना...

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

अफजल....कसाब औऱ......

अफजल....कसाब औऱ......



मुंबई पर एक बार फिर से आतंकी हमला....तीन अलग – अलग जगहों पर 18 मासूम असमय ही मौत के मुंह में समा जाते हैं....औऱ 100 से ज्यादा लोग अस्पताल में जिंदगी औऱ मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं....ऐसे में हमारे प्रधानमंत्री मुंबई जाते हैं....एक बार फिर से दोहराते हैं....मुंबई के दोषी बचेंगे नहीं....असल में प्रधानमंत्री जी कहना चाहते हैं...कि दोषियों को हर हाल में गिरफ्तार किया जाएगा....उन पर बकायदा मुकदमा चलाया जाएगा...इस दौरान उन्हें कडी सुरक्षा दी जाएगी....ताकि कोई उन्हें छू भी नहीं सके.....हमारे देश में हर किसी के साथ न्याय होता है...औऱ गिरफ्तार आतंकियों को केस लडने के लिए वकील उपलब्ध कराया जाएगा.....उम्मीद है दो से चार साल इसी तरह गुजर जाएंगे...जिसका जीता – जागता उदाहरण है....मुंबई का ही एक औऱ गुनहगार कसाब। इस सब के बाद अगर कोर्ट गिरफ्तार आतंकियों को धमाकों में मारे गये मासूम लोगों की मौत का दोषी ठहराते हुए सजा सुनाता है...तो आतंकियों के पास फिर भी उच्च न्यायालय औऱ सर्वोच्च न्यायालय में सजा के खिलाफ अपील करने का मौका रहेगा....यहां पर भी अगर सजा बरकरार रहती है....तो भी आतंकी राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका प्रस्तुत कर सकते हैं....जैसा कि संसद में हमले के आरोपी अफजल के मामले में हुआ....औऱ माननीय राष्ट्रपति उस पर कब तक फैसला लेतीं हैं....ये शायद किसी को नहीं पता.....। लेकिन उनका क्या....जिनके अपने असमय ही इन धमाकों की भेंट चढ गये...किसी के सिर से पिता का साया उठा....तो किसी की मांग का सिंदूर उजड गया....किसी ने रक्षा बंधन से पहले अपने भाई को खो दिया....तो किसी ने अपने बुढापे का सहारा....वैसे भी इंसान की याददाश्त बडी कमजोर होती है.....बेबस लोग कर भी क्या सकते हैं.....रोजी रोटी की जद्दोजहद में इतना समय ही कहां कि न्याय के लिए सडकों पर उतरें....कुछ दिन रोते हैं....औऱ जब आंसू सूखने के साथ ही अपनों की यादें धुंधली पड जाती हैं....तो जुट जाते हैं...अपने कल की चिंता में...लेकिन वे लोग उस कल को देख पाएंगे....ये शायद उनको भी नहीं पता....हां उनके आज को उनसे छीनने वाले जरूर ऐशो आराम की जिंदगी काट रहे हैं....। क्या कभी मासूमों के खून की होली खेलने वालों को वाकई में सजा होगी....या फिर संसद पर हमले के आरोपी अफजल औऱ 26/11 के गुनहगार कसाब की तरह आगे भी खून की होली खेलने वाले इसी तरह लोगों को मुंह चिढाते रहेंगे.....ये सवाल किसी एक का नहीं हर उस भारतवासी का है....जिसकी भारत मां के आंचल को आतंकियों ने मासूमों के खून से रंगा है। प्रधानमंत्री जी घटना के बाद घटनास्थल पर पहुंचकर सांतव्ना देकर....घटना की जांच की बात कहकर आप अपना पल्ला नहीं झाड सकते....किसी की मौत का दुख वही समझ सकता है....जिसने किसी अपने को खोया हो....चलिए आपकी बात मान भी लेते हैं कि गुनहगारों को बख्शा नहीं जाएगा....माना दोषी गिरफ्त में आ भी जाते हैं...औऱ उनको सजा भी होती है....तो क्या गारंटी है कि वे दूसरे अफजल औऱ कसाब नहीं बनेंगे। इसका जवाब आपके पास हो तो जरूर बताइयेगा....सारा देश इसे जानने के लिए उत्सुक है....।


दीपक तिवारी
deepaktiwari555@gmail.com    

बुधवार, 13 जुलाई 2011

जागो मनमोहन जागो

जागो मनमोहन जागो

एक बार फिर से.....वही हुआ जिसका डर था.....शायद हमारी सरकार को इसी का इंतजार था...हम पडोसी देश में पनप रहे आतंकवाद व आतंकियों पर कारवाई की बात ही दोहराते रह गये....आतंकियों को हमें सौंपने के लिए सूची ही बनाते रह गये औऱ आतंकियों ने बडी ही आसानी से एक बार फिर से हमारे ही घर में घुसकर एक के बाद एक तीन धमाके कर जता दिया....कि हम तो बेगुनाहों के खून से होली खेलेंगे....शायद आतंकी भी ये बात अच्छी तरह से समझते होंगे की हिन्दुस्तान की सरकार उनका कुछ नहीं बिगाड सकती.....हां इन धमाकों के बाद जरूर आतंकियों औऱ उनको पनाह देने वालों को चेतावनी देकर कि.....हमें कमजोर न समझना.....हम इसका कडा जवाब देंगे.....कहकर अपना पल्ला झाड लेगी। वैसे भी जिस देश का प्रधानमंत्री अपने सहयोगियों के खिलाफ कारवाई करने को लेकर खुद को मजबूर कह सकता है....वह अपने देशवासियों की रक्षा कैसे करेगा....या इसके लिए क्या कदम उठाएगा। हम अमेरिका द्वारा पाकिस्तान को  दी जाने वाली मदद को लेकर जरूर अमेरिका के दोहरे चरित्र की बात करते हैं...लेकिन मेरा ये मानना है कि वहां के सर्वोच्च पर बैठा व्यक्ति हमारे देश के प्रधानमंत्री की तरह कमजोर नहीं है....वह 09/11 जैसी घटनाओं के बाद सिर्फ बदला लेने की बातें नहीं करता...बल्कि आतंकियों को पनाह देने वालों के घर में घुसकर उसे मौत के घाट उतारता है....शायद यही फर्क है कि बैखौफ आतंकी हमेरे घर में घुसकर एक के बाद एक वारदात को अंजाम दे रहे हैं...औऱ निर्दोष देशवासियों को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड रही है....। सवाल ये है कि आखिर कब तक....ये सिलसिला चलता रहेगा....हम क्यों नहीं निर्दोष लोगों के खून से होली खेलने वालों को मुंहतोड जवाब देते....????.....क्या मनमोहन सरकार एक बार फिर से अमेरीका के 09/11 या फिर मुंबई के 26/11 के काले इतिहास को आतंकियों द्वारा दोहराए जाने का इंतजार कर रही है....???...या फिर आर्थर रोड जेल में आराम की जिंदगी जी रहे 26/11 के गुनहगार कसाब को जेल से छुडाने के लिए आतंकियों द्वारा किसी प्लेन को हाईजेक करने का इंतजार कर रही है....??? अभी भी समय है....जाग जाओ.....कहीं देर न हो जाए.......औऱ ऐसी किसी घटना के होने पर देशवासियों को फिर आपके श्रीमुख से सुनना पडे कि हमें अपने देशवासियों की जान की चिंता है....इसलिए हम आतंकियों की मांगों को मानते हुए 26/11 के गुनहगार कसाब को आतंकियों के हाथों में सौंपने जा रहे है.....जिन्हें हमारे जांबाज अफसरों औऱ जवानों ने अपने जान की बाजी लगाकर गिरफ्तार किया था।


दीपक तिवारी
deepaktiwari555@gmail.com

रविवार, 12 जून 2011

सवाल नीयत का है


सवाल नीयत की है

विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने को लेकर नौ दिनों से अनशन कर रहे बाबा रामदेव ने भले ही श्री श्री रविशंकर, कृपालु महाराज और मुरारी बापू के अनुरोध के बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया हो....लेकिन नौ दिनों तक चले बाबा के सत्याग्रह ने यूपीए सरकार की नीयत पर जरूर सवालिया निशान लगा दिया है...जो आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की परेशानी का सबब बन सकते हैं। नौ दिन पहले दिल्ली के रामलीला मैदान से सत्याग्रह शुरू करने वाले योगगुरू बाबा रामदेव का अनशन पहले दिन से ही भारी उतार – चढाव भरा रहा। सत्याग्रह शुरू होने के साथ ही जहां रामलीला मैदान में बाबा के समर्थकों का जमावडा लगना शुरू हो गयी था....वहीं बाबा के सत्याग्रह से घबराई यूपीए सरकार ने बाबा को मनाने की हरसंभव कोशिश की....इस बीच सरकार औऱ बाबा में सहमति बनने के आसार भी दिखे....लेकिन बाबा रामदेव की चिट्टठी का हवाला देते हुए यूपीए ने बाबा के सत्याग्रह को ढोंग करार देने की भी कोशिश की....जिसके बौखलाए बाबा ने सरकार पर उनकी मांगों पर सहमति के नाम पर धोखा देने का आरोप लगाया....औऱ इसके बाद रात के अंधरे में रामलीला मैदान में जो हुआ उसे पूरे देश ने देखा। देशभर में जहां बाबा रामदेव व उनके समर्थकों पर रामलीला मैदान में हुई पुलिसिया कारवाई को लेकर यूपीए सरकार की तीखी आलोचना हुई....वहीं बाबा के विरोधियों ने भी बाबा पर जमकर शब्दों के बाण छोडे। अब जब बाबा ने अपना अनशन समाप्त कर दिया है....तो इन नौ दिनों तक अंदर ही अंदर घबराई यूपीए सरकार ने जरूर राहत की सांस ली होगी....लेकिन ये नौ दिन सरकार की नीयत को जनता के सामने उजागर कर गये....जिसका भारत की राजनीती पर दीर्घकालीन असर पडेगा।
सवाल ये है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद कर भष्टाचारियों के खिलाफ कारवाई करने का दम भरने वाली यूपीए सरकार क्या वाकई में विदेशी बैंकों में जमा काले धन को वापस लाने को लेकर गंभीर थी....अगर हां तो क्यों सरकार ने अभी तक क्यों इसको लेकर कोई कारगर कदम नहीं उठाया....लेकिन लगता है कि शायद यूपीए सरकार को डर था कि अगर बाबा की मांगों पर अमल किया गया तो इसके छींटे उसके दामन में भी पडते....यानि कि सरकार की नीयत पहले दिन से ही काले धन को वापस लाने को लेकर साफ नहीं थी। अपनी नीयत में खोट के चलते पहले दिन से ही जहां यूपीए सरकार बाबा रामदेव के सत्याग्रह से डरी हुई थी....औऱ उसने इस सत्याग्रह को परदे पर आने से रोकने के लिए पुरजोर कोशिश भी की....औऱ जब वह इसमें सफल नहीं हुई तो जबरन रात के अंधेरे में सत्याग्रह का दमन कर दिय़ा गया।
इससे बडा उदहारण औऱ क्या होगा कि नौ दिनों तक चले बाबा रामदेव के अनशन के दौरान एक बार भी यूपीए सरकार को बाबा की सुध लेने की फुर्सत नहीं थी....हां यूपीए में शामिल कांग्रेस व उसके घटक दलों के नेताओं के पास मीडिया में बाबा के खिलाफ बयानबाजी करने की फुर्सत जरूर थी। इस दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाली देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए बाबा रामदेव को ही उनकी संपत्ति को लेकर उन्हें सवालों में घेरने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोडी। निश्चित तौर पर अगर बाबा रामदेव ने गलत तरीके से अपनी संपत्ति अर्जित की है तो उसकी भी जांच होनी चाहिए...लेकिन अपना – अपना दामन बचाने के चक्कर में असली सवाल पीछे छूटता दिखाई दे रहा है।  
बहरहाल काले धन को लेकर सत्याग्रह शुरू करने वाले बाबा अपने मिशन में कितने सफल होते हैं, ये तो समय ही तय करेगा...लेकिन सत्याग्रह के जरिए बाबा ने देशभऱ में भ्रष्टाचार के खिलाफ जो माहौल तैयार किया....औऱ इसे आम लोगों का जो जनसमर्थन मिला इसने एक बात तो साफ कर दी कि भ्रष्टाचार से आम आदमी त्रस्त हो चुका है.....साथ ही इस मुद्दे को लेकर जिस प्रकार केन्द्र सरकार ने असंवेदनशीलता दिखाई है...उसने सरकार की नीयत पर से पर्दा उठा दिया है....ऐसे में फैसला जनता को करना है कि देश से भ्रष्टाचार को मिटाने के प्रति उसकी नीयत क्या है...     औऱ उम्मीद है जनता भष्टाचार औऱ भ्रष्टाचारियों को अपनी नीयत का अंदाजा लोकतंत्र के माध्यम से ही वाकिफ कराएगी।  

दीपक तिवारी
deepaktiwari555@gmail.com

बुधवार, 8 जून 2011

भ्रष्टाचार 100 प्रतिशत



भ्रष्टाचार के खिलाफ गांधीवादी नेता अन्ना हजारे ने जो मुहिम शुरू की थी...उस सिलसिले को योगगुरू बाबा रामदेव ने आगे बढाया...जिसे देशभर में व्यापक जनसमर्थन भी मिला। भष्टाचार औऱ भ्रष्टाचारियों से त्रस्त हो चुके करोडों देशवासियों को भ्रष्टाचार विरोधी इस मुहिम से उम्मीदें थीं। बेशक ये सरकार की घबराहट की वजह भी बनती जा रही थी। जंतर मंतर पर अन्ना हजारे के अनशन की सफलता कई मायनों में सामने आयी। यूपीए सरकार लोकपाल बिल लाने को तैयार हो गयी...साथ ही एक समिती का गठन किया गया...जिसमें सरकार औऱ सरकार के बाहर के कुछ चुनिंदा लोगों को शामिल किया गया। लेकिन, विदेशी बैंकों में जमा देश के काले धन को वापस लाने की मांग को लेकर दिल्ली के रामलीला मैदान में मोर्चा खोलने वाले योगगुरू बाबा रामदेव के सत्याग्रह को यूपीए सरकार ने जिस तरह कुचल डाला....उसने एक बार फिर ये साबित किया कि भ्रष्टाचार रूपी दलदल को साफ करने के लिए हमारी सरकार बिल्कुल संजीदा नहीं है। भष्टाचार किस कदर अपने पांव पसार चुका है, इसका अंदाजा विदेशी बैंकों में जमा भारत के अपार काले धन को देखकर लगाया जा सकता है।  
एक छोटे से वाकये से आपको भी रूबरू कराना चाहूंगा...जिससे दिन ब दिन सुरसा के मुंह की तरह फैलते भ्रष्टाचार के दायरे का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है...।
वाक्या कुछ यूं है कि....एक बार हिंदुस्तान के एक मंत्री विदेश दौरे पर जाते हैं....उस देश में उनके एक समकक्ष मंत्री उनका जोरदार स्वागत करते हैं...मंत्री जी के लिए सभी ऐशो आराम के बेहतरीन इंतजाम करते हैं...साथ ही मंत्री जी को कीमती तोहफे भी भेंट करते हैं। शाही खातिरदारी से खुश मंत्री जी अपने आप को नहीं रोक पाते औऱ अपने समकक्ष मंत्री से पूछ ही लेते हैं...कि आपने इतना पैसा कैसे कमाया....?????
…..समकक्ष मंत्री मुस्कुराते हुए मंत्री जी को अपने घर की बालकनी में ले जाते हैं....औऱ दूर एक नदी पर बने एक पुल की ओर इशारा करते हुए कहते हैं....कि आप को नदी पर बना वह पुल दिख रहा है तो मंत्री जी कहते हैं...हां।
जिसके बाद समकक्ष मंत्री मुस्कुराते हुए कहते हैं......सिर्फ 50 प्रतिशत।
....छह माह बाद वही समकक्ष मंत्री हिंदुस्तान के दौरे पर आते हैं.....तो हमारे हिंदुस्तानी मंत्री भी उनकी जमकर खातिरदारी करते हैं....जिससे विदेशी मंत्री भी उनसे पूछे बिना नहीं रह पाते हैं.....औऱ पूछते हैं कि किस तरह उन्होंने इतना पैसा कमाया....??????
....तो मंत्री जी उन्हें अपने घर की बालकनी में ले जाते हैं....औऱ एक ओऱ इशारा करते हुए पूछते हैं कि आपको वह नदी नजर आ रही है....तो विदेशी समकक्ष का जवाब होता है....हां।
...मंत्री जी फिर पूछते हैं कि आपको नदी पर कोई पुल नजर आ रहा है.....तो इस बार उनका जवाब होता है.....नहीं।
हिंदुस्तान के मंत्री जी मुस्कुराते हुए अपनी बात आगे बढाते हैं....और गर्व से कहते हैं....100 प्रतिशत।
....इस छोटी सी कहानी से आप समझ ही गये होंगे कि हिंदुस्तान में भ्रष्टाचार किस कदर अपने पैर पसार रहा है।
ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार सिर्फ हिंदुस्तान में ही है...हिंदुस्तान के साथ ही दूसरे देशों में भी भ्रष्टाचार व्याप्त है....लेकिन एक सीमा तक। हमारे देश में भ्रष्ट नेताओं औऱ नौकरशाहों ने सारी सीमाएं लांघ दी है....औऱ वे सिर्फ अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं....हिंदुस्तान में कम पडे तो विदेशी बैंकों के लॉकरों को भी भ्रष्टाचार के काले धन से भर दिया। स्विटजरलैंड की एक रिपोर्ट ने इसे साबित भी किया है कि स्विस बैंकों में कुल जमा भारतीय रकम लगभग 66,000 अरब रूपये(1500 बिलीयन डॉलर) है...जो दूसरे देशों की अपेक्षा कई गुना ज्यादा है। ये आंकडे तो सिर्फ स्विटजरलैंड के है....इसके अलावा कई औऱ ऐसे देश हैं...जहां के बैंकों में बडी तादाद में देश का काला धन जमा है।
बहरहाल देर से ही हिंदुस्तान में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब लोग खुलकर आवाज उठा रहे हैं....जिसकी शुरूआत गांधीवादी नेता अन्ना हजारे औऱ उस सिलसिले को आगे बढाया योगगुरू बाबा रामदेव ने। हालांकि सरकार ने भष्टाचार के इस सत्याग्रह को कुचलने की पुरजोर कोशिश की.....जो अभी भी जारी है....लेकिन अन्ना हजारे और रामदेव की मुहिम अब जंतर मंतर औऱ रामलीला मैदान से देश के कोने - कोने तक पहुंच रही है....औऱ देशभर में लोग भ्रष्टाचार औऱ भष्टाचारियों के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं....औऱ निश्चित तौर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू हुआ जनांदोलन हिंदुस्तान की तकदीर को बदल सकता है....बस जरूरत है हर एक शख्स को इसके खिलाफ हुंकार भरने की...उम्मीद करते हैं कि कम से कम भष्टाचार की ये कहानी हिंदुस्तान के नाम के साथ फिर न दोहरायी जाए.....औऱ हम भष्टाचार 100 प्रतिशत की जगह कह सकें भष्टाचार....ये किस चिडिया का नाम है।

deepaktiwari555@gmail.com

रविवार, 5 जून 2011

ये कैसा लोकतंत्र है


ये कैसा लोकतंत्र है....
भ्रष्टाचारियों पर कारवाई को लेकर जनलोकपाल बिल के समर्थन में जंतर मंतर पर अन्ना हजारे के आंदोलन के आगे हथियार डालने वाली यूपीए सरकार ने चैन की सांस भी नहीं ली थी...कि रामलीला मैदान में योग गुरू बाबा रामदेव के काले धन के खिलाफ आंदोलन ने यूपीए सरकार की नींद उडा दी...हालांकि ऐसा नहीं था कि बाबा के आंदोलन को टालने के लिए यूपीए सरकार ने कोई कसर छोडी हो....लेकिन बाबा नहीं मानें औऱ बाबा ने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत चार जून की सुबह रामलीला मैदान में अपना आंदोलन शुरू किया। आंदोलन के बाद भी लगातार यूपीए सरकार के मंत्री बाबा के संपर्क में रहे और बाबा की मांगों पर सहमति जताते हुए इस पर कारवाई का आश्वासन भी दिया...लेकिन बाबा नहीं मानें....इस बीच शनिवार देर शाम कपिल सिब्बल ने बाबा की चिट्टठी का हवाला देते हुए मांगों पर सरकार औऱ बाबा में सहमति बनने का दावा किया....जिसके बाद बाबा ने सरकार पर विश्वासघात का आरोप लगाते हुए आंदोलन उसी प्रकार चलने का ऐलान किया।
इसके बाद शनिवार देर रात जो हुआ वह सबके सामने हैं। रात के अंधेरे में जब सब लोग सो रहे होते हैं तो दिल्ली पुलिस के आला अधिकारी करीब पांच हजार जवानों के साथ रामलीला मैदान को घेर लेते हैं...औऱ बाबा को गिरफ्तार कर लिया जाता है....इस दौरान विरोध करने वाले बाबा के समर्थकों पर पुलिस लाठियां भांजती है...औऱ समर्थकों को तितर बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोडे जाते हैं....वहां मौजूद बूढे बच्चों औऱ महिलाओं की परवाह न करते हुए बेरहमी से घसीट – घसीट कर समर्थकों को खदेडा जाता है। इस घटनाक्रम के बाद कई सवाल उठते हैं कि....क्या दुनिया के सबसे बडे लोकतंत्र होने की बात करने वाले हमारे देश में लोकतंत्र की यही परिभाषा है कि अपनी मांगों के समर्थन में सत्याग्रह करने वालों को रात के अंधेरे में गिरफ्तार कर लिया जाए...औऱ हजारों लोगों को बेरहमी से पीटा जाए.....इस पर बात करने से पहले जानते हैं कि आखिर क्यों शुरू किया बाबा ने आंदोलन।
दरअसल बाबा रामदेव लंबे समय से विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों के करीब 400 लाख करोड़ रुपये के काले धन को भारत वापस लाने औऱ उसे राष्ट्रीय संपत्ति घोषित करने की मांग कर रहे थे...औऱ इसी को लेकर बाबा ने चार जून से रामलीला मैदान में आंदोलन शुरू किया।
स्विटजरलैंड से मिले आंकडों पर दौर करें तो विश्व के सभी देशों के काले धन से ज्यादा अकेले भारत का काला धन है....स्विस बैंकों में कुल जमा भारतीय रकम लगभग 66,000 अरब रूपये (1500 बिलीयन डॉलर) है। स्विटजरलैंड ही नहीं इसके अलावा कई औऱ ऐसे देश हैं...जहां पर भारतीयों का काला धन जमा है। ये काला धन भ्रष्ट राजनीतिज्ञों, आईएएस, आईपीएस औऱ उद्योगपतियों का माना जाता है। चौंकाने वाली बात ये है कि यह रकम भारत पर कुल विदेशी कर्ज का 13 गुना है....औऱ हर साल विदेशी बैंकों में ये रकम तेजी से बढ रही है...लेकिन सरकार का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है। भारत जहां पर आज भी करीब 45 करोड(450 मिलियन) लोग गरीबी रेखा से नीचे का जीवन बिता रहे हैं। जिनकी रोजाना की औसत आमदनी 50 रूपये के करीब है....ऐसे में विदेशी बैंकों में जमा भारतीयों का काला धन भारत लाया जाता है तो भारत औऱ भारतीयों की काया पलट होते देर नहीं लगेगी।
हालांकि सरकार ने काले धन को राष्ट्रीय संपदा घोषित करने को लेकर एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाई है....जो इस तरह के धन को जब्त करने उसे राष्ट्रीय संपदा घोषित करने का कानूनी ढांचा सुझाएगी। इस समिति का प्रमुख केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन को बनाया गया है....फिलहाल इस कमेटी की रिपोर्ट आने में अभी समय है...औऱ उससे पहले ही रामदेव ने सख्ती से काले धन को भारत लाने की मांग को लेकर अपना आंदोलन शुरू किया....जिसे यूपीए सरकार ने कुचल दिया।
बात लोकतंत्र की हो रही थी....लोकतंत्र के नाम पर शनिवार औऱ रविवार की दरम्यानी रात जो हुआ क्या वह वाकई में शर्मशार कर देने वाला नहीं था। शायद यूपीए सरकार को डर था कि बाबा की लोकप्रियता के चलते दिल्ली की तरफ देश के हर कोने से बढता बाबा के समर्थकों का हुजूम सरकार को अन्ना हजारे के बाद दो माह में दूसरी बार झुकने को मजबूर न कर दे....इसलिए रातों रात बाबा के आंदोलन को कुचलने की तैयारी कर ली गयी...औऱ सुबह तक रामलीला मैदान एक उजाड बस्ती बनकर रह गया।
अगर यूपीए सरकार वाकई में विदेशों में जमा भारतीयों के काले धन को वापस लाकर उसका उपयोग देशहित में करने की नियत रखती तो शायद उसे बडे जनांदोलन का रूप ले रहे बाबा रामदेव के सत्याग्रह को कुचलने जरूरत नहीं पडती....औऱ सरकार बाबा की मांगों पर कारवाई के लिए खुद आगे बढकर आवश्यक कदम उठाती। लेकिन ये काम यूपीए क्या सत्तासीन कोई भी सरकार शायद ही करती क्योंकि ये बात छिपी नहीं है कि विदेशी बैंकों में पैसा जमा करने वाले बडी संख्या में राजनीतिज्ञ ही हैं....औऱ इसके बाद नंबर आता है नौकरशाहों व उन उद्योगपतियों का जो राजनीतिज्ञों की राजनीतिक पार्टियों को फंड के रूप में मोटी रकम देते हैं। लेकिन कहते हैं न कि भष्टाचार का एक ऐसा दलदल है जो एक दिन इसे बनाने वाले को ही लील लेता है।
यूपीए सरकार लोकतंत्र पर प्रहार करने से पहले ये भूल गयी कि लोकतंत्र का दमन करने से आप जीत नहीं सकते क्योंकि सरकार को भी इसी प्रक्रिया से गुजरना पडता है....औऱ यूपीए सरकार शाय़द ये भूल गयी कि ज्यादा समय नहीं हुआ है जब जनता ने लोकतंत्र की ताकत का एहसास पश्चिम बंगाल की 34 साल पुरानी वाम मोर्चा सरकार को करा दिया था..और एक झटके में वाम मोर्चे का पश्चिम बंगाल से सफाया हो गया....औऱ ऐसा ही कुछ तमिलनाडु में भी हुआ।
बहरहाल इस घटनाक्रम के बाद जहां देशभर में बाबा के समर्थकों के साथ ही आम लोगों में भी भारी रोष है....वहीं अब यूपीए सरकार के पास फिलहाल इसका कोई जवाब नहीं है.....लेकिन आज नहीं तो कल यूपीए सरकार को जवाब तो देना ही होगा।

दीपक तिवारी
09971766033
deepaktiwari555@gmail.com

शुक्रवार, 3 जून 2011

Content Is The King


Content Is The King……

मीडिया संस्थानों में कंटेट यानि की पाठकों व दर्शकों को परोसे जानी वाली विषय वस्तु को लेकर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं....और आज भी गाहे बगाहे कुछ संगोष्ठियों....परिचर्चांओं में मीडिया के दिग्गज बडे जोर – शोर से विषय वस्तु पर गहन मंथन करने की बात कर सफलता के लिए कंटेंट में निरंतर सुधार की बातकरते हैं....लेकिन संगोष्ठियों....परिचर्चांओं में मंच पर भाषण देने के बाद कितने लोग अपने संबंधित संस्थानों में विषय वस्तु को लेकर अपनी ही कही बातों पर अमल करते हैं.....यह बताने की जरूरत नहीं है। देखा जाए तो अखबार व टीवी भले ही दर्शकों व पाठकों के लिए पहली नजर में सिर्फ समाचार पाने का ही माध्यम है....औऱ यह काम समाचार पत्र औऱ टेलीविजन कर भी रह है....लेकिन किसी भी अखबार या चैनल की सफलता या लोकप्रिता सिर्फ समाचार को दर्शकों या पाठकों तक पहुंचा देने मात्र से नहीं बढ जाती। खबरों को पाठकों या दर्शकों को परोसने के लिए आप किस विषय वस्तु का प्रयोग कर रहे हं....यह एक बडा सवाल है। पाठक या दर्शक सिर्फ समाचार जानने के लिए ही नहीं अखबार या चैनल का रूख करते हैं....बल्कि वे विषय वस्तु पर भी उतना ही गौर करते हैं....और यही अखबार या चैनल की टीआऱपी को तय करते हैं.....जिसके लिए समाचार पत्र व टेलिविजन वाले किसी भी हद तक जाने से गुरेज नहीं करते।
....टीआऱपी के लिए नामी चैनलों से लेकर क्षेत्रिय चैनल कंटेंट के नाम पर दर्शकों को क्या परोस रहे हैं....इससे आप भली भांति परिचित हैं.....खबरों के नाम पर पाठकों व दर्शकों को डराना.....खुलेआम अश्लीलता परोसना....खबरों का पोस्टमार्टम कर वास्तविक खबर की बजाए विषय से भटकना। चैनलों में खबरों की जगह इन सब चीजों ने ले ली है....भले ही कुछ समय तक चैनल दर्शकों को खबरों के नाम पर यह सब परोसकर अपने साथ जोडे रखने में कामयाब भी हो जाएं....लेकिन इससे लंबे समय तक इससे दर्शकों को बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। अब जबकि देश में साक्षरता का प्रतिशत लगातार बढ रहा है....औऱ शिक्षा का अधिकार अधिनियम के लागू होने के बाद साक्षरता दर में औऱ ईजाफा होने की बात की जा रही है....ऐसे में कंटेंट का महत्व औऱ अधिक बढ जाता है। विषय वस्तु ही वह चीज है जो दर्शकों के मन में हमारी व हमारे संस्थानों की छवि को बनाती है। किसी खबर या खास प्रोग्राम को आप सिर्फ प्रसारित कर रहे हैं.....तो शायद दर्शक उसमें रूचि न लें....लेकिन बेहतर कंटेंट के बल पर आप इन्हीं खबरों औऱ प्रोगाम के दौरान भी दर्शकों को लगातार अपने साथ बांधे रख सकते हैं।
.....बेहतर कंटेंट जहां किसी भी चैनल को सैंकडों चैनलों की भीड से अलग पहचान दिलाता है.....औऱ वहां पर काम कर रहे लोगों के लिए भी काम करने का एक अच्छा माहौल तैयार करने में मदद करता है।
कंटेंट वास्तव में अखबार व चैनल का चेहरा तय करता है....औऱ चेहरे की यही चमक अखबार या चैनल को सबसे अलग खडा करती है….इसलिए कंटेंट यानि की विषय वस्तु को राजा कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

दीपक तिवारी
09971766033
deepaktiwari555@gmail.com

सोमवार, 30 मई 2011

ये तो लोकतंत्र है


ये तो लोकतंत्र है....

.......दुनियाभर में समय समय पर ऐसे कई प्रयोग हुए जिसने विश्व के सबसे बडे लोकतंत्र भारत की राजनीति औऱ अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाला....लेकिन जब बात मई के आखिरी सप्ताह से जून के पहले सप्ताह के बीच की हो रही है तो हाल ही में पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों को नहीं नकारा जा सकता है। दोनों ही राज्यों में दबी – कुचली व उपेक्षित माने जाने वाली नारी ने एक बार फिर से अपनी शक्ति का एहसास करा दिया....औऱ अपनी विजयी पताका फहराते हुए राजनीति हल्कों में खलबली मचा दी।पश्चिम बंगाल में जहां 34 सालों से कायम वामपंथी सरकार को जनता ने नकार दिया...वहीं ऐसा ही कुछ तमिलनाडु में भी घटा औऱ करुणानिधी सरकार को भी जनता ने आइना दिखा दिया। पश्चिम बंगाल औऱ तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में जीतने वाली दोनों पार्टियों तृणमूल कांग्रेस औऱ अन्ना द्रमुक की कमान महिला के हाथ में थी.....औऱ जनता ने पुरूष की बजाए महिला नेतृत्व पर अपनी मुहर लगायी...जिसके बाद देश में दिल्ली में शीला दीक्षित औऱ उत्तर प्रदेश में मायावती के बाद चार महिला मुख्यमंत्री हो गयी हैं.....जो देश में कम से कम महिलाओं के लिहाज से एक सूकून देने वाली खबर है....औऱ इससे निश्चित ही महिलाओं में नयी ऊर्जा का संचार भी हुआ है।
.....20 साल पहले 21 मई 1991 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या भी भारतीय राजनीति के लिए किसी बडे झटके से कम नहीं थी....युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के बाद हर कोई सकते में था.....औऱ कांग्रेस के लिए यह किसी भयंकर आघात की तरह था....खासतौर पर सोनिया गांधी के लिए.....लेकिन राजीव की हत्या के बाद देर से ही सही सोनिया गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली और दूसरी राजनीतिक पार्टियों के हमलों को झेलने के बाद भी एक बार फिर से कांग्रेस को स्थयित्व प्रदान किया.....औऱ साबित कर दिया कि महिला की ताकत क्या होती है।
.....और यही काम पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने वामपंथी सरकार को परास्त करके दिखा दिया। जिसके बाद ममता ने पश्चिम बंगाल की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया वहीं वह देश में 14वीं महिला मुख्यमंत्री भी बनीं.....वहीं दूसरी तरफ जयललिता ने दूसरी बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली।
.....सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन के जरिए जनता में अपनी पैठ बना लेने वाली ममता बनर्जी की सादगी औऱ मेहनत का ही नतीजा था कि जनता ने वाममोर्चा को नकारते हुए ममता की तृणमूल कांग्रेस पर अपना भरोसा जताया....औऱ भारी बहुमत से विजयी बनाया.....ममता ने भी वाममोर्चा सरकार को उखाड फेंकने के बाद 20 मई को शपथ लेने के तुरंत बाद सिंगूर के किसानों को 400 एकड जमीन वापस लौटाने की बात कही...जिसे वाममोर्चा सरकार ने अधिग्रहित कर लिया था.....साथ ही राज्य की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए उसी टाटा समूह को पश्चिम बंगाल में निवेश करने के लिए आमंत्रित भी किया....जिसको जमीन आवंटित करने के खिलाफ ममता ने किसानों के साथ मिलकर विरोध का झंडा बुलंद किया था।
....वहीं दूसरी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाली जयललिता ने भी भ्रष्टाचार के समुद्र में गोते लगा रही द्रमुक सरकार के खिलाफ जनता का विश्वास जीतने में सफल रही।
.....पश्चिम बंगाल औऱ तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद निश्चित तौर पर भारत ही नहीं दुनियाभऱ की उन राजनीतिक पार्टियों व राजनेता....जो सत्ता को सिर्फ ऐशो आराम का साधन समझते हैं....उनमें यह संदेश गया कि लोकतांत्रिक देश में लोकतंत्र से बडी कोई ताकत नहीं है....और समय आने पर जनता लोकतंत्र के माध्यम से रही उनको जवाब भी देने में सक्षम भी है।
....पश्चिम बंगाल व तमिलनाडु में जनता ने महिला नेतृत्व पर भरोसा दिखाकर राजनीति को अपनी बपौती समझने वाले राजनेताओं को करारा जवाब भी दिया है....ऐसा नहीं है कि महिलाओं ने इसे साबित नहीं किया है.....1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस की कमान संभालने वाली यूपीए अध्यक्ष  सोनिया गांधी हों.....लगातार दो बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी शीला दीक्षित हो या फिर उत्तर प्रदेश में अकेले दम पर सत्ता संबालने वाली मायावती...ये सब बखूबी अपने काम को अंजाम दे रही हैं.....औऱ इसी कडी को आगे बढाया है पश्चिम बंगाल में ममता व तमिलनाडू में जयललिता ने।
.....जब बात लोकतंत्र के वैकल्पिक मॉडल की हो रही है तो....हिंदुस्तान की बाहर की बात न कर अंदर की ही बात करें तो ये वाक्ये ....भारत ही नहीं दुनिया की राजनीति के लिए एक बडा सबक है.....औऱ निश्चित तौर पर दबी – कुचली व अबला समझी जाने वाली महिला के लिए किसी संजीवनी के कम नहीं है.....बस जरूरत है इस भरोसे को कायम रखने की।

दीपक तिवारी
09971766033
deepaktiwari555@gmail.com